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Why Became PCS or IAS.. Life changing script

गलाकाट प्रतियोगिता के बीच, अक्सर यह सवाल तैरता है कि 'मेरी उम्र ज्यादा हो गयी है/मैं जॉब करता/करती हूँ/खुद पर संदेह हो रहा' आदि इत्यादि....




देखिये, जहाँ तक उम्र का सवाल है यह सिर्फ एक संख्या है, अभी कल ही तो एक 53 वर्ष के व्यक्ति PCS बना है!




जॉब वाले भी सेलेक्ट होते हैं: आज ही अखबार में पढ़ा कि एक लड़का सिर्फ इन्टरनेट से पढ़कर चयनित हो गया, क्योंकि कोचिंग का समय नहीं था, जॉब की वजह से....और यह कि एक महिला ने जॉब छोड़कर व पति के कहने पर तैयारी की और SDM बन गयी!

कहने का अर्थ यह कि यह मत सोचो कि लोग क्या कहेंगे? अक्सर लोग भी कुछ ख़ास नहीं कहते, आप खुद ही कोई बहाना खोजते हैं, ताकि अपनी अनिच्छा को जायज ठहरा सकें....वाट्सपअप के माध्यम से एक चुटकुला फैला ही हुआ है कि पैसे की कमी से पढ़ नहीं पाया, यह कहने वाले बहुत हैं परन्तु पैसे की कमी से दारु-गुटखा छोड़ने वाले नहीं मिलेंगे!


सीधा हिसाब यह कि आपको करना है तो लाख बहाने खोजेंगे और नहीं करना है तब भी बहानों की कमी नहीं है....अगर तुमको करना है तो बस कूद जाओ रणभूमि में, हो जायेगा आज नहीं तो कल....और अगर मन नहीं है तो तुरंत छोडो. मन नहीं कर रहा तो किसी भी कीमत पर नहीं होगा।

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मन है तभी जुटिये. यह जिन्दगी तुम्हारी है, किसी से कोई मतलब नहीं है, किसी के पास इतना टाइम नहीं है कि तुम्हारा ट्रैक-रिकॉर्ड चेक कर रहा है, तुमको जो मजा दे रहा वह करो. मेरा नहीं होगा, कैसे होगा, ये सब सिर्फ आपकी मानसिक कमजोरी है. सबके पास आइंस्टीन जितना दिमाग नहीं है लेकिन एक कमजोर मानव दिमाग भी आईएएस पी सी एस निकाल सकने के लिए पर्याप्त है।


यह निश्चय ही आपके क्षमता के अंदर है, बस अपना स्टैंड क्लियर करें और सफलता प्राप्त करे। अभी से उडान भरे इस नये सफर की और।

  • आप सभी को शुभकामनाये।